🚩महाकाली भक्ति के महासागर में डूबा सिलौंडी बाजार : मोहल्ला में विराजीं मां कालिका, पूज्य गुरुजी के मुखारविंद से 'महाकाली भागवत पुराण' का रसपान कर धन्य हुए हजारों श्रद्धालु
हिमांशु
Tue, Oct 13, 2026
🚩महाकाली भक्ति के महासागर में डूबा सिलौंडी: बाजार मोहल्ला में विराजीं मां कालिका, पूज्य गुरुजी के मुखारविंद से 'महाकाली भागवत पुराण' का रसपान कर धन्य हुए हजारों श्रद्धालु🚩
कटनी (मध्य प्रदेश)सिलौंडी। ढीमरखेड़ा तहसील के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक ग्राम सिलौंडी के बाजार मोहल्ला में इस वर्ष शारदीय नवरात्रि महोत्सव आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का एक अनुपम केंद्र बन गया है। इस पावन धरा पर आदिशक्ति मां महाकाली की अलौकिक और भव्य प्रतिमा विराजमान की गई है। माता के इस दिव्य स्वरूप के सानिध्य में पूज्य गुरुजी के पावन सानिध्य में चल रहे संगीतमय महाकाली भागवत पुराण कथा का आज तीसरा दिन पूर्ण धार्मिक विधि-विधान और अभूतपूर्व जन-उत्साह के साथ संपन्न हुआ। व्यासपीठ से बरस रहे कथा के अमृत रस को पीने और जगज्जननी के दर्शन के लिए संपूर्ण क्षेत्र से श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ रहा है।


अंकुर राय के भगीरथ प्रयासों से सिलौंडी में सनातन धर्म की अविरल गंगा
इस भव्य धार्मिक महामहोत्सव, पवित्र पुराण कथा के भव्य आयोजन और माता रानी को ससम्मान विराजमान करने का मुख्य श्रेय ग्राम के परम धार्मिक और ऊर्जावान युवा श्री अंकुर राय (पिता श्री गणेश राय जी) को जाता है। सनातन धर्म के प्रति अटूट आस्था रखने वाले अंकुर राय के अथक प्रयासों, कुशल प्रबंधन और दिन-रात की सेवा के कारण ही सिलौंडी की इस पावन धरा पर इतना विशाल आयोजन संभव हो सका है। उनके इस भगीरथ प्रयास की न केवल सिलौंडी बल्कि पूरे कटनी जिले और आसपास के क्षेत्रों में जमकर सराहना की जा रही है।
तीसरे दिन की कथा: जब गुरुजी की वाणी से प्रकटीं मां जगदम्बा
कथा के तीसरे दिन पूज्य गुरुजी ने अपने मुखारविंद से मां महाकाली के प्राकट्य, असुर संहार और उनके ममतामयी स्वरूप के दिव्य प्रसंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। गुरुजी ने बताया कि:
"मां महाकाली केवल संहार की देवी नहीं हैं, बल्कि वे भक्तों के भय को हरने वाली और परम कल्याण करने वाली आदि-शक्ति हैं। नवरात्रि में जो जीव पूर्ण समर्पण के साथ मां के चरणों में शीश नवाता है, उसके जीवन के सभी अंधकार दूर हो जाते हैं।"
पूज्य गुरुजी के भजनों और संगीतमय चौपाइयों पर पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। सुबह और संध्याकाल में होने वाली भव्य महाआरती के समय पूरा बाजार मोहल्ला "जय माता दी" और "मां महाकाली की जय" के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात देवलोक सिलौंडी की धरती पर उतर आया हो।
नवरात्रि, शक्ति साधना और महाकाली पुराण का आध्यात्मिक महत्व
सनातन परंपरा में नवरात्रि केवल व्रत और उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि यह अंतःकरण की शुद्धि और ब्रह्मांडीय ऊर्जा (शक्ति) को खुद में समाहित करने का नौ दिवसीय महापर्व है। सिलौंडी में महाकाली भागवत पुराण का श्रवण करना अपने आप में दुर्लभ संयोग है।
• नकारात्मक ऊर्जा का नाश: देवी भागवत के अनुसार, जहां मां महाकाली की कथा होती है, वहां से दरिद्रता, रोग, शोक और नकारात्मक शक्तियां कोसों दूर भाग जाती हैं।
• सुख-समृद्धि का वास: ग्रामीणों का अटूट विश्वास है कि इस अनुष्ठान से सिलौंडी और समस्त क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा, खुशहाली और सुख-समृद्धि का वास होगा।
आयोजक मंडल ने दीं शुभकामनाएं, क्षेत्र के कल्याण की कामना
इस पावन नवरात्रि पर्व और कथा महोत्सव के शुभ अवसर पर मुख्य आयोजक श्री अंकुर राय एवं उनके समस्त सहयोगी मित्रों द्वारा सभी ग्रामवासियों और क्षेत्रवासियों को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं। अंकुर राय ने माता रानी के चरणों में वंदन करते हुए प्रार्थना की कि:
"मां महाकाली का दिव्य आशीर्वाद, सुख, अपार शांति और अटूट समृद्धि के रूप में हमारे सभी क्षेत्रवासियों पर हमेशा बना रहे। गांव का हर घर-आंगन खुशियों से चहके और सनातन की यह अलख हमेशा जलती रहे।"
इस धार्मिक उत्सव में सिलौंडी सहित आसपास के दर्जनों गांवों के गणमान्य नागरिक, मातृशक्ति और युवा वर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहकर धर्म लाभ ले रहे हैं।
MPnewslive.
कटनी जिला पत्रकार हिमांशु
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