हनुमान चालीसा पाठ के साथ शुरू हुआ प्रदर्शन, जिलेभर से पहुंचे लोग : यूजीसी कानून के विरोध और आरक्षण के मूलभूत ढांचे में सुधार की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर धरना
पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी
Mon, Sep 7, 2026
यूजीसी कानून के विरोध और आरक्षण के मूलभूत ढांचे में सुधार की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर धरना
हनुमान चालीसा पाठ के साथ शुरू हुआ प्रदर्शन, जिलेभर से पहुंचे लोग; मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रखने का ऐलान
कटनी। यूजीसी कानून के विरोध तथा आरक्षण व्यवस्था के मूलभूत ढांचे में सुधार की मांग को लेकर अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद सहित विभिन्न संगठनों के नेतृत्व में सोमवार को कटनी कलेक्ट्रेट के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू किया गया। प्रदर्शन की शुरुआत सुबह हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुई। इसके बाद दिनभर शहर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की मौजूदगी में सभा का दौर जारी रहा।
धरना प्रदर्शन में अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद के अध्यक्ष राकेश मिश्रा, राष्ट्रीय महासचिव अवधेश उरमलिया, राष्ट्रीय करणी सेना के सुजीत सिंह सोलंकी सहित अन्य पदाधिकारी एवं प्रदर्शनकारी शामिल हुए। दिनभर समर्थन में पहुंचे लोगों के कारण सभा स्थल पर भीड़ बनी रही। आयोजकों ने प्रदर्शन को मिल रहे समर्थन को देखते हुए आगामी दिनों में आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया है।
यूजीसी कानून की विसंगतियों का मुद्दा उठाया
धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मंचासीन वक्ताओं ने यूजीसी कानून को लेकर अपनी आपत्तियां और विचार व्यक्त किए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से सवर्ण समाज द्वारा विभिन्न चुनावों में सत्तारूढ़ राजनीतिक दल का समर्थन किए जाने के बावजूद अब उनके हितों के विपरीत यूजीसी कानून लागू किया जा रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि उनके मत में यूजीसी कानून की कई व्यवस्थाएं सवर्ण समाज के लिए अन्यायपूर्ण हैं और इन्हें लेकर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कानून के प्रावधानों को लेकर समाज में असंतोष है और सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सभा में वक्ताओं ने यह भी कहा कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति के विरुद्ध अपराध सिद्ध होने से पहले दंडात्मक कार्यवाही किए जाने की स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था सवर्ण समाज को हाशिए पर ले जाने वाली है।
कानून वापस नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी कानून को पूर्णतः वापस लेने की मांग दोहराते हुए कहा कि यदि उनकी मांग पर सरकार द्वारा सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि सवर्ण समाज की उपेक्षा का राजनीतिक असर भी भविष्य में देखने को मिल सकता है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलन को केवल एक विरोध प्रदर्शन के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसके पीछे उठाए जा रहे सामाजिक और नीतिगत सवालों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
आरक्षण व्यवस्था में सुधार और आर्थिक आधार की मांग
धरना प्रदर्शन के दौरान आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में व्याप्त विभिन्न विसंगतियों को दूर करने तथा आरक्षण का आधार आर्थिक किए जाने की मांग रखी।
वक्ताओं का कहना था कि सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि आरक्षण व्यवस्था का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद वर्ग तक पहुंचाने के लिए इसके मौजूदा ढांचे में आवश्यक सुधार किए जाएं।
मांग पूरी होने तक अनशन जारी रखने का ऐलान
आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर अनशन जारी रखने की बात कही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं की जाती, तब तक वे धरना और अनशन जारी रखेंगे।
सोमवार को सुबह से शुरू हुआ आंदोलन देर तक जारी रहा। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों के पहुंचने का सिलसिला दिनभर चलता रहा। आयोजकों का कहना है कि सोमवार को मिले समर्थन से उनका उत्साह बढ़ा है और आने वाले दिनों में आंदोलन में सहभागिता और बढ़ सकती है।
आज धरना स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वालों में सर्व श्री नरेंद्र समदरिया, शिवम एवं शुभम, बाल्मीकि मिश्रा, गणेश शंकर गर्ग, अशोक भैरव पांडे, यश दुबे, राज तिवारी, शैलेंद्र सिंह बघेल, पंकज तिवारी, दिनेश तिवारी, जिलाध्यक्ष आरती तिवारी, आशीष मिश्रा, आशीष तिवारी, चेतन सचदेवा, श्रीराम पांडे, मंटू मिश्रा, इत्यादि लोगों की रही।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार की ओर से क्या पहल की जाती है और आंदोलन आगामी दिनों में किस स्वरूप में आगे बढ़ता है।

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