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किसान हेल्पलाइन 155253 का शुभारंभ किया। : सीएम डॉ. मोहन यादव ने शुरू की किसान हेल्पलाइन 155253, कहा- अन्नदाता के हित में हुई अहम पहल

पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी

Thu, Apr 30, 2026

सीएम डॉ. मोहन यादव ने शुरू की किसान हेल्पलाइन 155253, कहा- अन्नदाता के हित में हुई अहम पहल

- भोपाल में कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का शुभारंभ

- किसान कल्याण डैशबोर्ड से मिलेंगी महत्वपूर्ण जानकारियां

- सरकार ने प्रतिबद्धता के बलबूते कई असंभव कार्यों को पहुंचाया लक्ष्य तक

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्ग पर चलकर मध्यप्रदेश को बनाएंगे संपन्न

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 30 अप्रैल को राजधानी भोपाल के रविंद्र भवन में कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण प्रशिक्षण एवं कार्यशाला में शामिल हुए। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड, पैक्स समितियों में सदस्यता वृद्धि का महा-अभियान और किसानों के लिए टोल फ्री- सीएम किसान हेल्पलाइन 155253 का शुभारंभ किया। इसके अलावा उन्होंने सीएम किसान हेल्पलाइन से कनेक्ट होकर कृषि संबंधी जानकारी भी ली।

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष में 16 विभाग एक साथ मिलकर पवित्र भाव से कार्य कर रहे हैं। यह कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला हम सभी के लिए नया अनुभव होगा। आज उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन जैसे कई विभागों को जोड़कर सरकार किसान कल्याण के लिए आगे बढ़ रही है। आज किसानों की सेवा के लिए टोल फ्री- सीएम किसान हेल्पलाइन 155253 का शुभारंभ किया गया है। किसानों के लिए कार्य करते हुए नए प्रयोगों के साथ अपने मन के नए अंकुरण और कोमलता को जीवंत रखने की आवश्यकता है उन्होंने कहा कि किसान हितैषी कार्यों के लिए मन के पवित्र भाव से संकल्पित होकर कार्य किया जाए। राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के बलबूते कई असंभव कार्यों को लक्ष्य तक पहुंचाया है। नेशनल डेयरी डेवलमेंट बोर्ड के माध्यम से पशुपालन विभाग के लिए किए गए प्रयास इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रदेश में दूध क्रांति हो रही है। किसानों को 8 से 7 रुपए प्रति लीटर ज्यादा दूध के दाम मिलने लगे हैं।

किसानों कृषि की नई तकनीक का मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 1956 में गेहूं का भाव करीब 90 से 100 रुपए क्विंटल था, उसके बाद 55 साल में गेहूं की कीमत सिर्फ 400 रुपए बढ़ी थी। लेकिन, राज्य में हमारी सरकार बनने के बाद 400 रुपए तो बीते तीन साल में हो बढ़ गए। इस वर्ष राज्य सरकार किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीद रही है। प्रदेश के किसान अब फसल के साथ-साथ एग्री वेस्ट मटेरियल की प्रोसेसिंग कर मक्के के डंठल, गेहूं और धान की नरवाई से भूसा बनाकर लाभ कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रदेश के किसानों कृषि की नई तकनीक का लाभ मिलेगा ताकि उनकी आय में वृद्धि हो, लागत घटे और उपज का बेहतर मूल्य मिले। सभी कृषि कर्मयोगी सरकार के साथ मिलकर संपूर्ण श्रद्धा के साथ इस कार्य में सहभागी बनें।

बराबर हैं जवान और किसान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बारिश के बाद होने वाली रबी की फसल पहले भगवान भरोसे होती थी। लेकिन, आज खेत-खेत तक नहरों के माध्यम से सिंचाई सुविधा और पंप से सिंचाई के लिए बिजली पहुंच गई है। समय बदल रहा है। ब हमारे किसान दो नहीं, ग्रीष्मकाल में तीसरी फसल भी लेने लगे हैं। राज्य सरकार ने उड़द की फसल पर समर्थन मूल्य के साथ 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की शुरुआत की है। राज्य सरकार के लिए सीमा पर जवान और खेतों में किसान दोनों बराबर हैं। उन्होंने कहा कि कृषक परिवारों से आने वाले युवा डॉक्टर, इंजीनियर बनना चाहते हैं। लेकिन, खेती को भी लाभ का जरिया बनाया जा सकता है। इसके लिए युवाओं को प्रेरित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इजरायल जैसे देशों में कम बारिश के बाद भी खेती के प्रति ललक देखते ही बनती है। इजरायल ने अपनी क्षमता योग्यता के बल पर खेती को आधुनिक और आय का जरिया बनाया है।

गुजरात की तरह समृद्ध हो रहा प्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश को तीन-तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात मिली। केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से मध्यप्रदेश और राजस्थान के कई जिले लाभान्वित हो रहे हैं। इनके लिए केंद्र सरकार ने लागत की 90 प्रतिशत राशि दी है। पीकेसी परियोजना पर सहमति के लिए राजस्थान के 15 जिलों के लोग मध्यप्रदेश सरकार को कोटि-कोटि धन्यवाद दे रहे हैं। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और यहां जलराशियों का पर्याप्त भंडार है। प्रधानमंत्री मोदी ने मां नर्मदा के आशीर्वाद से गुजरात को विकसित और अग्रणी राज्य बनाया है। अब हमार…

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