सिलौंडी मंडल में धूमधाम से मनाई गई पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मजयंती : अंत्योदय' और 'एकात्म मानववाद' के सिद्धांतों को किया याद
हिमांशु
Sat, Sep 26, 2026सिलौंडी मंडल में धूमधाम से मनाई गई पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म जयंती, 'अंत्योदय' और 'एकात्म मानववाद' के सिद्धांतों को किया याद
कटनी (मध्य प्रदेश)सिलौंडी।: जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत सिलौंडी मंडल में भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रखर राष्ट्रवादी, कुशल संगठनकर्ता और भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म जयंती गौरवपूर्ण तरीके से मनाई गई। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनके तैलचित्र पर तिलक वंदन और माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह गरिमामयी कार्यक्रम सिलौंडी मंडल के दशरमन में आयोजित किया गया, जो सिलौंडी मंडल अध्यक्ष मनीष सिंह बागरी और मंडल उपाध्यक्ष सीमा भारत शुक्ला की मुख्य मौजूदगी में संपन्न हुआ।
कुशाग्र बुद्धि और देश सेवा के प्रति समर्पित था जीवन: मनीष सिंह बागरी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंडल अध्यक्ष मनीष सिंह बागरी ने पंडित जी के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान में हुआ था। वे बचपन से ही अत्यंत मेधावी छात्र थे, जिन्होंने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट दोनों ही परीक्षाओं में बोर्ड में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने कानपुर के सनातन धर्म कॉलेज से बी.ए. और आगरा से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. की शिक्षा ग्रहण की।
आगे कहा कि पंडित जी बचपन में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए थे और वर्ष 1942 में वे संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बने। इसके बाद, वर्ष 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक बनकर उन्होंने देश को एक नई राजनीतिक दिशा दी।
अंत्योदय' और 'एकात्म मानववाद' ही विकास का सच्चा मार्ग: सीमा भारत शुक्ला
मंडल उपाध्यक्ष सीमा भारत शुक्ला ने अपने संबोधन में पंडित जी के बौद्धिक और पत्रकारिता जीवन को याद किया। उन्होंने कहा कि पंडित जी एक कुशल संगठनकर्ता होने के साथ-साथ उत्कृष्ट लेखक और निर्भीक पत्रकार भी थे। उन्होंने राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और स्वदेशी जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं का संपादन किया।
उनके वैचारिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि पंडित जी का सबसे बड़ा योगदान उनकी विचारधारा है, जिसे 'एकात्म मानववाद' (Integral Humanism) कहा जाता है। उनका स्पष्ट नारा था— "हर हाथ को काम, हर खेत को पानी"। उन्होंने 'अंत्योदय' का सिद्धांत दिया, जिसका अर्थ है कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उदय और विकास ही देश का सच्चा विकास है। आज की सरकारें भी इसी अंत्योदय के मार्ग पर आगे बढ़ रही हैं।
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कटनी जिला रिपोर्टर हिमांशु
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