दुगाड़ी नाला मार्ग पर सामने आया मामला नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था : कचरा प्लांट की बाउंड्रीवाल के बाहर नालियों का बदबूदार कीचड़ डंप, 500 मीटर के दायरे में स्कूल, रेस्टोरेंट-होटल और आबादी
पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी
Sat, Sep 5, 2026
कचरा प्लांट की बाउंड्रीवाल के बाहर नालियों का बदबूदार कीचड़ डंप, 500 मीटर के दायरे में स्कूल, रेस्टोरेंट-होटल और आबादी
कटनी। शहर को स्वच्छ और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन दुगाड़ी नाला मार्ग पर सामने आया मामला नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। रिहायशी क्षेत्र, विद्यालयों, रेस्टोरेंट और होटल से लगभग 500 मीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्र में नालियों से निकला बदबूदार कीचड़ और गंदगी नगर निगम की कचरा एकत्रित करने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली से डंप किए जाने की स्थिति सामने आई है।
मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि यह स्थान MSW कचरा प्लांट की बाउंड्रीवाल के बाहर है। बताया जा रहा है कि इसी दुगाड़ी नाले के ठीक नीचे से ट्विन्स किचन की ओर जाने वाले मार्ग के आसपास कुछ ही दिन पूर्व भी गंदगी और अव्यवस्था का मामला सामने आया था। अब उसी क्षेत्र में नालियों से निकला मलयुक्त और दुर्गंधयुक्त कीचड़ डंप किए जाने से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
500 मीटर के दायरे में आबादी और व्यावसायिक गतिविधियां, फिर डंपिंग क्यों?
यह क्षेत्र किसी सुनसान स्थान पर नहीं है। इसके आसपास रिहायशी क्षेत्र के साथ विद्यालय, रेस्टोरेंट और होटल संचालित हैं तथा आम नागरिकों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है। ऐसे में सवाल है कि यदि नालियों से निकले कीचड़ का निस्तारण करना था तो इसके लिए ऐसा स्थान क्यों चुना गया, जहां लोगों की आवाजाही और संवेदनशील गतिविधियां मौजूद हैं?
खुले में जमा बदबूदार कीचड़ से दुर्गंध के साथ मच्छर-मक्खियों की समस्या तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा होने की आशंका बनी रहती है। खासकर विद्यालय के आसपास ऐसी स्थिति बच्चों और आम नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है।
MSW प्लांट की बाउंड्रीवाल के बाहर किसके निर्देश पर डंपिंग?
मौके पर नगर निगम की ट्रैक्टर-ट्रॉली से गंदगी डंप किए जाने के दौरान वाहन चालक से जानकारी ली गई। चालक ने कथित तौर पर बताया कि नगर निगम की ओर से ही रिहायशी क्षेत्र की नालियों से निकली गंदगी और कीचड़ को यहां डंप करने के लिए कहा गया है।
यदि चालक का यह कथन सही है तो अब जांच का विषय यह है कि किस अधिकारी के निर्देश पर यह गंदगी यहां डंप कराई जा रही है और क्या MSW प्लांट की बाउंड्रीवाल के बाहर उक्त स्थान पर ऐसी डंपिंग के लिए कोई अधिकृत अनुमति है?
यदि स्थान अधिकृत है तो उसके स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी मानकों की जांच भी आवश्यक है, और यदि अधिकृत नहीं है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई क्यों न की जाए?
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल
मामला सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। विभाग का दायित्व शहर में स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की निगरानी करना है। ऐसे में सवाल है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इस मामले की जांच कर नगर निगम के ही अमले द्वारा की जा रही कथित डंपिंग पर कार्रवाई करेगा?
यदि जांच में नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं, कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में यह सवाल भी उठेगा कि आखिर विभागीय लापरवाही की जवाबदेही किसकी होगी।
नगर निगम आयुक्त और जिला प्रशासन से जांच की मांग
पूरे मामले में नगर निगम आयुक्त से अपेक्षा है कि मौके का निरीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराई जाए। जांच में यह सामने आना चाहिए कि गंदगी डंप करने के लिए स्थान का चयन किस आधार पर हुआ, किस अधिकारी ने निर्देश दिए और क्या निर्धारित नियमों एवं स्वास्थ्य मानकों का पालन किया गया।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि दुगाड़ी नाले के नीचे से ट्विन्स किचन की ओर जाने वाले मार्ग पर कुछ दिन पूर्व सामने आई गंदगी की स्थिति पर क्या कार्रवाई की गई थी और उसके बाद भी उसी क्षेत्र में गंदगी डंप करने की नौबत क्यों आई।
यदि नगर निगम स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है तो जिला प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता है।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग कब लेगा संज्ञान?
खुले क्षेत्र में नालियों से निकला दूषित कीचड़ डंप किए जाने से पर्यावरणीय प्रभाव की संभावना भी बनी रहती है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण कर यह जांच किया जाना चाहिए कि डंपिंग से आसपास की हवा, जमीन और वातावरण पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ रहा। यदि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सवाल गंदगी हटाने का नहीं, जिम्मेदारी तय करने का है
दुगाड़ी नाला मार्ग का यह मामला केवल एक स्थान पर कीचड़ डंप किए जाने तक सीमित नहीं है। यह सवाल है कि शहर से उठाई गई गंदगी का वैज्ञानिक और सुरक्षित निस्तारण कहां और किस तरीके से किया जा रहा है।
यदि रिहायशी क्षेत्र, विद्यालय और रेस्टोरेंट-होटलों के आसपास ही नालियों की गंदगी डंप की जाती है तो स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शहर को गंदगी मुक्त बनाने के लिए केवल गंदगी उठाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका उचित और सुरक्षित निस्तारण भी जरूरी है।
अब निगाहें नगर निगम आयुक्त, स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग पर हैं कि वे इस मामले में जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं या नहीं और यदि लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होती है।
स्वच्छ शहर का दावा तभी सार्थक होगा, जब स्वच्छता की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग अपने ही अमले की कथित लापरवाही पर भी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इनका कहना है
वहां पर कचरा डंप करना मना है पूर्व में कार्यवाही भी की गई थी और जुर्माना भी लगाया गया था और अगर ऐसा हो रहा है तो नोटिस जारी करके कार्यवाही की जाएगी
शैलेश गुप्ता उपायुक्त नगर निगम
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