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युवाओं को जहर और टैक्स विभाग को ठेंगा! : कटनी। कैश-किंग' और 'पटेल साहब': गुटखा जगत के दो सूरमाओं का 'नगद नारायण' खेल, युवाओं को जहर और टैक्स विभाग को ठेंगा!

पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी

Sat, May 30, 2026

कटनी। कैश-किंग' और 'पटेल साहब': गुटखा जगत के दो सूरमाओं का 'नगद नारायण' खेल, युवाओं को जहर और टैक्स विभाग को ठेंगा!

कटनी सहित पूरे देश में डिजिटल क्रांति की लहर चल रही है, सब्जी वाले से लेकर मॉल तक लोग फोन पे और क्यूआर कोड स्कैन कर रहे हैं। लेकिन पान-मसाले और गुटखे की चमकीली दुनिया में दो ऐसे दिग्गज खिलाड़ी बैठे हैं, जिन्होंने अपनी सल्तनत में देश के कानून को ही 'कैश-लेस' (टैक्स-लेस) कर दिया है। बाजार में इन दिनों गुटखा जगत के दो बड़े चेहरों की खूब चर्चा है—एक वो जो अपने नाम में ही 'कैश' (नगद) की महिमा समेटे हुए हैं, और दूसरे वो जो 'पटेल' उपनाम की साख पर करोड़ों का साम्राज्य चला रहे हैं।

इन दोनों 'गुटखा-वीरों' ने इन दिनों बाजार में ऐसा निराला खेल रचा है कि बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी सिर पकड़ लें। युवाओं को 'जहर' बेचने का यह पूरा कारोबार अब पूरी तरह से 'ऑन-पेपर' व्यवस्था को ठुकराकर शुद्ध रूप से 'कैश एंड कैरी' की पटरी पर दौड़ रहा है।

खेल का अनोखा फॉर्मूला: एक बिल 'दिखावे' का, बाकी खेल 'कैश' का

बाजार के अंदरूनी सूत्रों और त्रस्त हो चुके डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इनके काम करने के जादुई तरीके का पर्दाफाश किया है:

* एक का बिल, दस की ढील: जब कंपनी के गोदाम से माल निकलता है, तो सरकारी अफसरों को दिखाने के लिए महज एक गाड़ी का पक्का जीएसटी बिल काटा जाता है। लेकिन, उसी एक बिल की छत्रछाया में पीछे-पीछे 10 गाड़ियां बिना किसी कागज, बिना किसी बिल और बिना किसी टैक्स के सीधे मार्केट में उतार दी जाती हैं।

* रिटेलर को 'नो एंट्री': जब यह माल गली-मोहल्ले के छोटे दुकानदारों तक पहुंचता है, तो उनसे साफ कह दिया जाता है कि डिजिटल पेमेंट भूल जाओ। कड़कड़ाते नोट लाओ, 'कैश' और 'पटेल साहब' का माल ले जाओ। अगर किसी ने बिल की मांग की, तो उसे सीधे धमकी मिलती है कि "दुकान पर माल आना बंद हो जाएगा।"

युवाओं की नसें खोखली, तिजोरियां हरी-भरी

सबसे बड़ा दर्द यह है कि इस पूरे खेल का शिकार देश की युवा पीढ़ी हो रही है। युवाओं को जिस जहर की लत लगाई जा रही है, उसका मुनाफा किसी वैध खाते में नहीं, बल्कि सीधे काले धन की तिजोरियों में 'कैश' बनकर जमा हो रहा है।

एक व्यापारी का तंज:

* "ये कंपनियां युवाओं को कत्था-चूना लगाकर उनकी सेहत से तो खिलवाड़ कर ही रही हैं, साथ ही देश के राजस्व पर भी थूक रही हैं। जब 90 फीसदी माल बिना बिल के सिर्फ नगदी पर बिकेगा, तो सरकारी खजाने को तो चूना लगना तय है।"

कब टूटेगा यह 'नगद' का सिंडिकेट?

सरकारी एजेंसियां आए दिन छोटे-मोटे व्यापारियों पर जीएसटी के छापे मारती हैं, लेकिन 'कैश' और 'पटेल' ब्रांड की बिना बिल वाली गाड़ियां सड़कों पर सीना तानकर दौड़ रही हैं। युवाओं की जिंदगी और देश के टैक्स, दोनों को स्वाहा कर रहा यह 'निराला खेल' अब खुलेआम चल रहा है।

अब देखना यह है कि टैक्स विभाग के सूरमा इस 'नगद सिंडिकेट' के धुएं को कब तक नजरअंदाज करते हैं, या फिर हमेशा की तरह ये गुटखा किंग पूरे सिस्टम को चूना लगाकर आगे निकल जाएंगे!

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